सीमा पर गोलीबारी का शिकार ग्रामीण राज्य में इलाज के उचित देख भाल के अभाव के कारण बाहरी राज्यों में जाने को मजबूर

सीमा पर पाकिस्तानी गोलीबारी का शिकार मरीज इलाज के अभाव के कारण बाहरी राज्यों में जाने को मजबूर


जम्मू (राजेंद्र भगत) जम्मू कश्मीर में आए दिन सीमा पर गोलीबारी की घटनाएं हो रही है जिसमें पाकिस्तान द्वारा सीजफायर के वॉयलेशन के कारण सीमा के पास रहने वाले आम नागरिक जख्मी हो जाते हैं जिन्हें तुरंत जम्मू के मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जाता है ताकि उनका इलाज हो सके, उन्हें बचाया जा सके। लेकिन उस मरीज का बाद में क्या हाल होता है इस पर कोई भी समाचार प्रकाशित नहीं होता ना ही सरकार का कोई नुमाइंदा उन्हें देखने आता है ऐसे बहुत से मरीज आज भी अस्पतालों में पड़े हैं जिनके पास पैसे की कमी है और वह महंगे इलाज नहीं करवा पाते इस पर सरकार को अलग से विचार करना होगा क्योंकि सीमा पर घायल होने वाले लोगों को बचाना सरकार का की जिम्मेवारी है पर वह अपनी जिम्मेवारी पर खरी नहीं उतर रही अक्सर ऐसे मरीज इलाज में देरी के कारण अपने अंगों को खो देते हैं । ज्ञात रहे कि जब कोई इस तरह का मरीज अस्पताल में आता है तो उसे कुछ संस्थाएं इलाज के नाम पर मदद करती है जो मात्र 5-10 हजार तक की होती है उसके बाद उसके इलाज की जिम्मेदारी सरकार की स्वास्थ्य विभाग की होती है परंतु वह मरीज दवाइयों और देख-रेख के अभाव के कारण अस्पताल छोड़कर पंजाब या दिल्ली में इलाज करवाने जाता है या फिर गंभीर बीमारी का शिकार हो जाता है ऐसे बहुत से मरीज अस्पतालों में पड़े हैं जिनकी आवाज समय-समय पर कुछ संस्थाएं उठाती भी है और बहुत से ग्रामीण जो गोलीबारी का शिकार हुए होते हैं वह मरीज को बचाने में असफल हो जाते हैं इस पर सरकार को गंभीरता से सोचना होगा यह मरीज किसी बीमारी से नहीं बल्कि पाकिस्तानी गोलीबारी से जख्मी होते हैं इन्हें बचाना सरकार का फर्ज है सरकार को इस पर गंभीरता से सोच विचार करना होगा।
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