पहले प्रयास मे साहित्यकारो का सुखद-प्रेरक सहयोग मिल रहा है। यह हमें अदम्य शक्ति दे रहा है।
"प्रजातंत्र का स्तंभ" समूह ने मीडिया मे देश - विदेश में, अपनी खबरों से अलग स्थान बनाया है, लेकिन इसी संस्थान ने, साहित्य को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, अब प्रकाशन के काम महत्वाकांक्षी शुरुआत की है और प्रजातंत्र का स्तंभ- प्रकाशन के तत्वावधान में, "नई रोशनी -नई पहल" का सॉझा संकलन निकालने के लिए, देशभर के साहित्यकारो से रचनाएं आमंत्रित की जा रही हैं।
इस पहले प्रयास को, साहित्यकारों ने भी भरपूर प्रोत्साहित किया है व दिल खोल कर सहयोग कर रहे हैं । बडी संख्या मे रचनाएं प्राप्त हो रही हैं। इस उत्साह को देखतेहुए व सम्मान करते हुए, रचना भेजने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2018 नियत की गई है। लेकिन जिस प्रकार साहित्यकारो का उत्साह इस प्रकाशन के प्रति देखने को मिल रहा है, वह सुखद अनुभूति देता है।
डॉक्टर रघुनाथ मिश्र 'सहज'
संरक्षक, प्रजातंत्र का स्तंभ- प्रकाशन
"प्रजातंत्र का स्तंभ" समूह ने मीडिया मे देश - विदेश में, अपनी खबरों से अलग स्थान बनाया है, लेकिन इसी संस्थान ने, साहित्य को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, अब प्रकाशन के काम महत्वाकांक्षी शुरुआत की है और प्रजातंत्र का स्तंभ- प्रकाशन के तत्वावधान में, "नई रोशनी -नई पहल" का सॉझा संकलन निकालने के लिए, देशभर के साहित्यकारो से रचनाएं आमंत्रित की जा रही हैं।
इस पहले प्रयास को, साहित्यकारों ने भी भरपूर प्रोत्साहित किया है व दिल खोल कर सहयोग कर रहे हैं । बडी संख्या मे रचनाएं प्राप्त हो रही हैं। इस उत्साह को देखतेहुए व सम्मान करते हुए, रचना भेजने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2018 नियत की गई है। लेकिन जिस प्रकार साहित्यकारो का उत्साह इस प्रकाशन के प्रति देखने को मिल रहा है, वह सुखद अनुभूति देता है।
डॉक्टर रघुनाथ मिश्र 'सहज'
संरक्षक, प्रजातंत्र का स्तंभ- प्रकाशन






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