नहीं मिलता डिपो से राशन कहां करें शिकायत?
जम्मू(राजेंद्र भगत) बहुत कम लोग हैं जिन्हें उनके हिस्से का राशन मिलता है ज्यादातर लोगों की शिकायत है कि हमें हमारे हिस्से का राशन नहीं मिल पाता जबकि इसके विपरीत राशन डिपो वालों का तर्क होता है कि "अभी आपका राशन नहीं आया जब आएगा तो मिल जाएगा" और इसी प्रक्रिया में उपभोक्ता का महीना निकल जाता है और अगले महीने वही उपभोक्ता अगर राशन लेता भी है तो वह भी एक ही महीने का क्योंकि उसे से यही कहा जाता है कि अभी एक महीने का राशन ही आया है इसी तरह उसके हिस्से का पिछला राशन ब्लैक में किसी और को वेच दिया जाता है
ऐसी बहुत सी धांधलियां है जो उपभोक्ता को मिलने वाले सरकारी राशन में होती हैं कभी उनको उनके हिस्से का आटा नहीं मिलता अगर मिलता है तो पूरा नहीं मिलता कभी चावल नहीं मिलते कभी चीनी नहीं मिलती ऐसी शिकायतें लगभग बहुत सारे राशन उपभोक्ताओं की होती है परंतु इसकी शिकायत कहां की जाए और क्या ऐसी शिकायत पर कोई कार्रवाई होती भी है ऐसा कभी सामने नहीं आता ज्ञात रहे कि शहरों में लगभग सभी लोग सरकारी राशन पर निर्भर होते हैं और सरकार कहती है कि प्रत्येक व्यक्ति को उसके हिस्से का 4 किलो आटा 1 किलो चावल और लगभग आधा किलो चीनी दी जाती है यह सरकारी आंकड़े हैं परंतु जमीन पर क्या किसी को उनके हिस्से का पूरा राशन मिलता है इस पर सरकार कभी ध्यान नहीं देती और अगर कोई उपभोक्ता इसकी शिकायत करता भी है तो उसकी प्रक्रिया इतनी लंबी होती है कि वह थक हार कर अपनी शिकायत पर आगे कार्यवाही नहीं करता और वलेक की यह प्रक्रिया यूं ही चलती रहती है इसके विपरीत शिकायत करने वाले उपभोक्ता को विभाग की तरफ से और राशन डिपू वाले की तरफ से शिकायत के बाद राशन नहीं मिलता इतना ही नहीं यदि वह उपभोक्ता किसी दूसरे राशन डिपो पर खुद का राशन कार्ड जमा करवाता है तो वह डिपू धारक भी उसे अपने डिपू पर दर्ज नहीं करता कि यह व्यक्ति कहीं मेरे डिपू की शिकायत ना कर दे।
उपभोक्ताओं की शिकायतों पर कार्रवाई ना होने के कारण राशन ब्लॉक करने वाले लोग धड़ल्ले से राशन ब्लैक की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते रहते हैं यह बात तो हुई शहरों की यदि ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जाए तो हालात बद से बदतर हैं वहां तो कोई नियम ही नहीं है केवल ग्रामीण लोग राशन डिपो की बात का भरोसा करने पर मजबूर हैं यदि वह कहता है कि आपके हिस्से का राशन आया है या अभी नहीं आया या तीन या चार महीने बाद आएगा इत्यादि और उन उपभोक्ताओं के हिस्से का राशन हर महीने ब्लैक में चला जाता है
ऐसी शिकायतें केवल किसी एक क्षेत्र की नहीं अपितु राज्य के हर जिले की है किंतु इसके विपरीत कुछ ऐसे राशन डिपू भी हैं जो अपने काम को समाज सेवी की भांति चलाते हैं और राशन को अपने क्षेत्र के उपभोक्ताओं को स्वयं संदेश भेजकर लेने को कहते हैं किंतु ऐसे राशन डिपो की संख्या बहुत कम है
राशन से जुड़े हुई शिकायतें अत्यंत गंभीर विषय है क्योंकि हर नागरिक को राशन मिले यह हर नागरिक के मूल अधिकार का हिस्सा है इस पर मिलने वाली शिकायतें विभाग को गंभीरता से लेनी चाहिए तथा राज्य सरकार को भी इस पर निगरानी कमेटी बनाकर तुरन्त कारवाही करनी चाहिए।
जम्मू(राजेंद्र भगत) बहुत कम लोग हैं जिन्हें उनके हिस्से का राशन मिलता है ज्यादातर लोगों की शिकायत है कि हमें हमारे हिस्से का राशन नहीं मिल पाता जबकि इसके विपरीत राशन डिपो वालों का तर्क होता है कि "अभी आपका राशन नहीं आया जब आएगा तो मिल जाएगा" और इसी प्रक्रिया में उपभोक्ता का महीना निकल जाता है और अगले महीने वही उपभोक्ता अगर राशन लेता भी है तो वह भी एक ही महीने का क्योंकि उसे से यही कहा जाता है कि अभी एक महीने का राशन ही आया है इसी तरह उसके हिस्से का पिछला राशन ब्लैक में किसी और को वेच दिया जाता है
ऐसी बहुत सी धांधलियां है जो उपभोक्ता को मिलने वाले सरकारी राशन में होती हैं कभी उनको उनके हिस्से का आटा नहीं मिलता अगर मिलता है तो पूरा नहीं मिलता कभी चावल नहीं मिलते कभी चीनी नहीं मिलती ऐसी शिकायतें लगभग बहुत सारे राशन उपभोक्ताओं की होती है परंतु इसकी शिकायत कहां की जाए और क्या ऐसी शिकायत पर कोई कार्रवाई होती भी है ऐसा कभी सामने नहीं आता ज्ञात रहे कि शहरों में लगभग सभी लोग सरकारी राशन पर निर्भर होते हैं और सरकार कहती है कि प्रत्येक व्यक्ति को उसके हिस्से का 4 किलो आटा 1 किलो चावल और लगभग आधा किलो चीनी दी जाती है यह सरकारी आंकड़े हैं परंतु जमीन पर क्या किसी को उनके हिस्से का पूरा राशन मिलता है इस पर सरकार कभी ध्यान नहीं देती और अगर कोई उपभोक्ता इसकी शिकायत करता भी है तो उसकी प्रक्रिया इतनी लंबी होती है कि वह थक हार कर अपनी शिकायत पर आगे कार्यवाही नहीं करता और वलेक की यह प्रक्रिया यूं ही चलती रहती है इसके विपरीत शिकायत करने वाले उपभोक्ता को विभाग की तरफ से और राशन डिपू वाले की तरफ से शिकायत के बाद राशन नहीं मिलता इतना ही नहीं यदि वह उपभोक्ता किसी दूसरे राशन डिपो पर खुद का राशन कार्ड जमा करवाता है तो वह डिपू धारक भी उसे अपने डिपू पर दर्ज नहीं करता कि यह व्यक्ति कहीं मेरे डिपू की शिकायत ना कर दे।
उपभोक्ताओं की शिकायतों पर कार्रवाई ना होने के कारण राशन ब्लॉक करने वाले लोग धड़ल्ले से राशन ब्लैक की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते रहते हैं यह बात तो हुई शहरों की यदि ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जाए तो हालात बद से बदतर हैं वहां तो कोई नियम ही नहीं है केवल ग्रामीण लोग राशन डिपो की बात का भरोसा करने पर मजबूर हैं यदि वह कहता है कि आपके हिस्से का राशन आया है या अभी नहीं आया या तीन या चार महीने बाद आएगा इत्यादि और उन उपभोक्ताओं के हिस्से का राशन हर महीने ब्लैक में चला जाता है
ऐसी शिकायतें केवल किसी एक क्षेत्र की नहीं अपितु राज्य के हर जिले की है किंतु इसके विपरीत कुछ ऐसे राशन डिपू भी हैं जो अपने काम को समाज सेवी की भांति चलाते हैं और राशन को अपने क्षेत्र के उपभोक्ताओं को स्वयं संदेश भेजकर लेने को कहते हैं किंतु ऐसे राशन डिपो की संख्या बहुत कम है
राशन से जुड़े हुई शिकायतें अत्यंत गंभीर विषय है क्योंकि हर नागरिक को राशन मिले यह हर नागरिक के मूल अधिकार का हिस्सा है इस पर मिलने वाली शिकायतें विभाग को गंभीरता से लेनी चाहिए तथा राज्य सरकार को भी इस पर निगरानी कमेटी बनाकर तुरन्त कारवाही करनी चाहिए।







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