JAMMU JOURNALIST

वार्ताकार की नियुक्ति आखिर किस के साथ वार्ता करने के लिए हुई है ?

अगर वार्ता हुरईयत वालों (अलगाव वादीयों) के साथ करनी है, तो व्यर्थ का प्रयास है, समय और सरकारी खज़ाने की बरबादी!

वार्ता में कशमीर का युवा, कशमीरी पंडितों का भागीदार होना ही वार्ता की सार्थकता हो सकता है

            परसीन सिंह
            पत्रकार एवं समाजिक सेवक
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