केन्द्र और राज्य सरकार ने क्या दिया जम्मू को
आजादी के बाद जम्मू कश्मीर ही ऐसा राज्य रहा है जिसकी परस्थिति को मद्देनजर रखकर बड़ी पार्टिया दूसरे राज्यों में चुनाव लड़ती रही हैं किसके शासनकाल में जम्मू-कश्मीर की स्थिति कैसी थी किस ने हालात को कितना काबू किया और कौन नाकाम रहा के आधार पर कई राज्यों की विधानसभाओं और प्रधानमंत्री पदों के लिए वोट मांगे जाते रहे हैं। ऐसा नहीं है कि केंद्र की बड़ी पार्टियों ने राज्य को कुछ दिया नहीं पर ध्यान देने योग्य बात है कि अगर केंद्र सरकारों ने जम्मू-कश्मीर राज्य को सबसे अधिक दिया है तो फिर राज्य के हालात आज भी इतने बुरे क्यों हैं?
1.अस्थाई कर्मचारियों को कई वर्षों से सैलरी नहीं मिली।
2.पहाड़ी और कंडी क्षेत्रों में पीने के पानी की गंभीर समस्या है
3.किसान आज भी नई तकनीक से कोसों दूर हैं
3.राज्य की स्वास्थ्य सुविधाएं चरमराई हुई हैं सारी व्यवस्था राज्य के दो प्रमुख अस्पतालों तक ही सीमित है
4.बेरोजगारी के आंकड़े पिछले कई वर्षों में तेजी से बढ़े हैं
राज्य में बड़े बड़े प्रोजेक्टों पर सैकड़ों करोड़ आया पर राज्य की बेरोजगारी की समस्या कम करने के नाम पर कुछ नहीं हुआ।
__इन सब में एक बात गौर करने योग्य है कि जितनी भी राज्य की समस्याएं हैं उनमें अधिकतर समस्याएं राज्य के जम्मू क्षेत्र की है
__सीमा पर गोलीबारी का नुकसान जम्मू में,आए दिन पाकिस्तानी गोलीबारी से हताहत लोग जम्मू में, किसानों का नुकसान जम्मू में, कोई बड़ा प्रोजेक्ट अगर नहीं बना तो जम्मू में, बेरोजगारी सबसे अधिक जम्मू में,टूरिज्म का कोई विशेष लाभ अगर किसी को नही है तो बह जम्मू को, जम्मू में केवल माता वैष्णो देवी यात्रा के इलावा और कोई स्थान नही जो सैलानियों को आकर्षित करे उसका कारण है इस क्षेत्र की अनदेखी।
राज्य को कई बार केंद्र सरकार की ओर से बड़े-बड़े आर्थिक पैकेज मिले पर उन से राज्य में कितना आर्थिक सुधार हुआ वह कहीं नजर नहीं आता शहरों के आसपास कुछ सड़कें बनी हैं परंतु ग्रामीण क्षेत्र आज भी अच्छी सड़क के लिए तरस रहे हैं खेलकूद के मैदान, खिलाड़ियों के लिए कोई विशेष सुविधा, सरकारी स्कूलों का सुधार,पंचायतों को अधिकार,किसानों के लिए खेती संबंधित कोई नई तकनीक,युवाओं के लिए कोई सरकारी योजनाएं, किसानों या हताहत लोगों के लोन माफी का कोई प्रबंध, नए कार्य करने के लिए नौजवानों दुकानदारों एवं महिलाओं के लिए कोई लोन इत्यादि की सुविधा नही,यह कुछ ऐसे आंकड़े हैं जो केवल कागजों पर तो हैं परंतु इनपर किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया और ना ही इन योजनाओं को जमीन पर उतारा फाइलों तक तो यह योजनाएं कई वर्षों से चल रही हैं।
दिल्ली में बैठी सरकारें जम्मू कश्मीर के आतंकवाद पर तो चर्चा करती है परंतु राज्य की बेरोजगारी की समस्या कितनी गंभीर है इस पर कभी ध्यान नहीं देती। राज्य के बेरोजगार युवाओं का सरकारी नौकरियों से मन भर चुका है उनके सामने दिहाड़ीदार सरकारी कर्मचारियों की भीड़ प्रतिदिन सड़कों पर अपनी सैलरी के लिए नारे लगाते दिखाई देती है कई संगठन काई काई महीनों से धरने पर बैठे हैं कुछ संगठन तो वर्षों से अपनी मांगों के लिए धरने पर बैठे हैं बेरोजगार युवक दिल्ली-चंडीगढ़ या दूसरे राज्यों में रोजगार की तलाश कर रहे हैं इनमें अधिकतर संख्या जम्मू क्षेत्र के बेरोजगारों की है क्योंकि दिल्ली से जिस जम्मू कश्मीर समस्या के निवारण की बात होती है वह केवल घाटी तक ही सीमित रहता है परंतु जम्मू को हमेशा हर सरकार नजरअंदाज करती रही है शायद इसका कारण है कि यहां कभी अलगाववाद या विदेशी झंडे नही लहराए गए।
__ राजेन्द्र भगत,राज्य प्रमुख,आल इण्डिया प्रेस परिषद
आजादी के बाद जम्मू कश्मीर ही ऐसा राज्य रहा है जिसकी परस्थिति को मद्देनजर रखकर बड़ी पार्टिया दूसरे राज्यों में चुनाव लड़ती रही हैं किसके शासनकाल में जम्मू-कश्मीर की स्थिति कैसी थी किस ने हालात को कितना काबू किया और कौन नाकाम रहा के आधार पर कई राज्यों की विधानसभाओं और प्रधानमंत्री पदों के लिए वोट मांगे जाते रहे हैं। ऐसा नहीं है कि केंद्र की बड़ी पार्टियों ने राज्य को कुछ दिया नहीं पर ध्यान देने योग्य बात है कि अगर केंद्र सरकारों ने जम्मू-कश्मीर राज्य को सबसे अधिक दिया है तो फिर राज्य के हालात आज भी इतने बुरे क्यों हैं?
1.अस्थाई कर्मचारियों को कई वर्षों से सैलरी नहीं मिली।
2.पहाड़ी और कंडी क्षेत्रों में पीने के पानी की गंभीर समस्या है
3.किसान आज भी नई तकनीक से कोसों दूर हैं
3.राज्य की स्वास्थ्य सुविधाएं चरमराई हुई हैं सारी व्यवस्था राज्य के दो प्रमुख अस्पतालों तक ही सीमित है
4.बेरोजगारी के आंकड़े पिछले कई वर्षों में तेजी से बढ़े हैं
राज्य में बड़े बड़े प्रोजेक्टों पर सैकड़ों करोड़ आया पर राज्य की बेरोजगारी की समस्या कम करने के नाम पर कुछ नहीं हुआ।
__इन सब में एक बात गौर करने योग्य है कि जितनी भी राज्य की समस्याएं हैं उनमें अधिकतर समस्याएं राज्य के जम्मू क्षेत्र की है
__सीमा पर गोलीबारी का नुकसान जम्मू में,आए दिन पाकिस्तानी गोलीबारी से हताहत लोग जम्मू में, किसानों का नुकसान जम्मू में, कोई बड़ा प्रोजेक्ट अगर नहीं बना तो जम्मू में, बेरोजगारी सबसे अधिक जम्मू में,टूरिज्म का कोई विशेष लाभ अगर किसी को नही है तो बह जम्मू को, जम्मू में केवल माता वैष्णो देवी यात्रा के इलावा और कोई स्थान नही जो सैलानियों को आकर्षित करे उसका कारण है इस क्षेत्र की अनदेखी।
राज्य को कई बार केंद्र सरकार की ओर से बड़े-बड़े आर्थिक पैकेज मिले पर उन से राज्य में कितना आर्थिक सुधार हुआ वह कहीं नजर नहीं आता शहरों के आसपास कुछ सड़कें बनी हैं परंतु ग्रामीण क्षेत्र आज भी अच्छी सड़क के लिए तरस रहे हैं खेलकूद के मैदान, खिलाड़ियों के लिए कोई विशेष सुविधा, सरकारी स्कूलों का सुधार,पंचायतों को अधिकार,किसानों के लिए खेती संबंधित कोई नई तकनीक,युवाओं के लिए कोई सरकारी योजनाएं, किसानों या हताहत लोगों के लोन माफी का कोई प्रबंध, नए कार्य करने के लिए नौजवानों दुकानदारों एवं महिलाओं के लिए कोई लोन इत्यादि की सुविधा नही,यह कुछ ऐसे आंकड़े हैं जो केवल कागजों पर तो हैं परंतु इनपर किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया और ना ही इन योजनाओं को जमीन पर उतारा फाइलों तक तो यह योजनाएं कई वर्षों से चल रही हैं।
दिल्ली में बैठी सरकारें जम्मू कश्मीर के आतंकवाद पर तो चर्चा करती है परंतु राज्य की बेरोजगारी की समस्या कितनी गंभीर है इस पर कभी ध्यान नहीं देती। राज्य के बेरोजगार युवाओं का सरकारी नौकरियों से मन भर चुका है उनके सामने दिहाड़ीदार सरकारी कर्मचारियों की भीड़ प्रतिदिन सड़कों पर अपनी सैलरी के लिए नारे लगाते दिखाई देती है कई संगठन काई काई महीनों से धरने पर बैठे हैं कुछ संगठन तो वर्षों से अपनी मांगों के लिए धरने पर बैठे हैं बेरोजगार युवक दिल्ली-चंडीगढ़ या दूसरे राज्यों में रोजगार की तलाश कर रहे हैं इनमें अधिकतर संख्या जम्मू क्षेत्र के बेरोजगारों की है क्योंकि दिल्ली से जिस जम्मू कश्मीर समस्या के निवारण की बात होती है वह केवल घाटी तक ही सीमित रहता है परंतु जम्मू को हमेशा हर सरकार नजरअंदाज करती रही है शायद इसका कारण है कि यहां कभी अलगाववाद या विदेशी झंडे नही लहराए गए।
__ राजेन्द्र भगत,राज्य प्रमुख,आल इण्डिया प्रेस परिषद






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