जम्मू शहर भी सूदखोरों की गिरफ्त में

जम्मू शहर भी सूदखोरों की गिरफ्त में

जम्मू में सूदखोरी का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है पिछले कुछ वर्षों से यह धंधा अपराध की भांति फल-फूल रहा है नशे और अवैध वसूली जैसे धंधों पर जब से पुलिस ने काबू पाया है तब से 50 का 100 बनाने वाले लोग सूदखोरी के धंधे में आ गए हैं यह धंधा भी एजेंटों के माध्यम से चलता है पैसा लेने वाली पार्टियों को ढूंढने वाले एजेंट कमीशन पर कार्य करते हैं इस धंधे को चलाने वाले लोग अजीब तरीका अपनाते हैं उदाहरण के लिए अगर किसी को ₹100 चाहिए तो वह उसे 20% महीना सूद की दर पर रकम दी जाती है जो मात्र दिखावा है जिसे ₹1 प्रति रोज के हिसाब से 5 महीने तक वसूला जाता है अगर कुछ दिन रकम नहीं मिलती तो उस रकम तथा उसके सूद पर फिर से सूद लगाकर उसे वसूला जाता है यदि ध्यान दें तो यह सूद 100% की दर से भी अधिक बन जाता है इसी तर्ज पर हजारों लाखों रुपए का आदान-प्रदान किया जाता है

         पिछले कुछ समय से राज्य का जम्मू क्षेत्र व्यापारिक दृष्टि से बुरे दौर से गुजर रहा है बाजारों की छोटी-छोटी दुकानें रिहाड़ी फडीयों, छोटे होटल,सब्जी मंडियों के आसपास, बस स्टैंड रेलवे स्टेशनों के आसपास काम करने वाले लोग तथा प्रतिदिन खरीदारी करके ठेलों पर समान बेचने वाले लोगों को शिकार बनाया जाता है जिनसे रोज वसूली की जाती है अक्सर बदनामी और डर के कारण सूद खोरी का शिकार हुआ व्यक्ति पुलिस में भी कंप्लेन नहीं करता जिस कारण सूदखोरों के हौसले और बढ़ जाते हैं
            कुछ लोगों का मानना है सूद खोरी का शिकार कई लोगों की दुकानों पर,उनकी रेहड़ी फड़ी पर उनके काम करने के स्थान पर सूदखोर जबरन कब्जा कर लेते हैं ऐसा माना जाता है कुछ लोगों ने इस 100% सूद से तंग आकर खुदकुशी भी की हैं इसमें दुकानों के मालिक छोटे व्यापारी प्रतिदिन खरीद फरोख्त करके रोड़ों पर सामान बेचने वाले लोग इत्यादि लोकलाज के कारण पुलिस में ना जाकर अपनी जीवन लीला को समाप्त करने की कोशिश कर लेते हैं
        इस सुदखो से तंग कई लोग तो राज्य छोड़कर अन्य शहरों में भाग जाते हैं बहुत से लोग तो विदेशों में भी चले गए कुछ मामले तो ऐसे भी हुए कि अगर सूर खोरी की रकम देने में व्यक्ति असमर्थ हो गया तो उसको बैंक से सरकारी कर्ज दिलाने में भी सूदखोर मदद करते हैं जिसके पश्चात वह उस रकम से अपनी वसूली करके अलग हो जाते हैं और व्यक्ति बैंकों से भागता फिरता है
राज्य प्रशासन को ऐसे मामलों पर गंभीरता से नई रणनीति बनानी होगी तथा इस प्रकार की यदि कोई शिकायत आती है तो कारवाही तुरन्त होनी चाहिए क्योंकि इसमें देरी बुरी घटना में बदल जाती है इसमें गौर करने वाली बात यह है कि बहुत से लोग जो सूद खोरी के सताए हैं वह गुंडागर्दी एवं लोक लाज के कारण पुलिस के पास जाने में कतराते हैं इस तरह की शिकायतों के लिए पुलिस को कुछ टेलीफोन नम्बर जारी करने चाहिए ताकि गुप्त तरीके से भी शिकायत दर्ज किए जा सके।
 -- राजेंद्र भगत,राज्य प्रमुख (जम्मू कश्मीर) विश्व मानवाधिकार परिषद --

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