सबसे छोटे कीड़े ने विश्व युद्ध से भी अधिक तबाही मचा दी। राजेंद्र भगत

लेख- राजेंद्र भगत

कोरोना के आतंक से सारी दुनिया में हाहाकार मचा है बड़े-बड़े वैज्ञानिक और विकासशील देश भी इससे निजात पाने की कोशिश में ही लगे हैं कोशिश कितनी सफल होती है इस बार भी आशंका है। केवल कोरोना पीड़ित को अलग-थलग रखने पर ही जोर दिया जा रहा है क्योंकि अभी तक कोई भी  वेक्सीन पूर्ण रूप से नहीं बन पाई केवल शोध ही जारी है
इस महामारी से त्रस्त विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं राष्ट्रपति ट्रंप ने आशंका जताई है कि उनके देश में आने वाले समय में मरने वालों का आंकड़ा और अधिक होगा इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत से कई गुना आगे स्वास्थ्य उपकरणों और शोध में आगे रहा अमेरिका यदि कोरोना महामारी के समय असहाय अनुभव कर रहा है तो उन देशों की स्थिति कैसी होगी जो देश आर्थिक रूप से कमजोर हैं तथा स्वास्थ्य सुविधाओं में भी अमेरिका से काफी पीछे हैं इटली चीन तथा ईरान से जो परिणाम सामने आए हैं उससे अनुमान लगाया जा सकता है कि यह त्रासदी दुनिया के लिए कितनी घातक है
भारत में भी समय रहते हैं इस से निजात पाने के उपाय खोजने शुरू कर दिए थे तथा सबसे पहले लॉक डाउन करके इस बीमारी को फैलने से रोकने का पहला हथियार इस्तेमाल कर दिया था शायद यह उसका ही परिणाम है कि भारत में अभी तक कोरोना ग्रसित मरीजों की संख्या सीमित दायरे में ही है इसके साथ केंद्र सरकार ने जो राज्य सरकारों को निर्देश दिए राज्य सरकारों ने भी उसे तुरंत लागू किया जिन राज्यों में देरी की वहां के परिणाम देखे जा सकते हैं पर देर आए दुरुस्त आए अब सभी राज्य सरकारें केंद्र के दिशा निर्देश पर चल रही है
          प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सूझबूझ ने इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए किए गए निर्णय सराहनीय हैं मोदी लगातार दुनिया के अन्य देशों के राष्ट्रीय अध्यक्षों के संपर्क में हैं कोरोना वायरस पर दुनिया भर में बनने वाली नई रणनीति और विचार-विमर्श कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार के नए शोध तथा लाभ को जनता तक पहुंचाया जा सके इस बात की संयुक्त राज्य के देशों ने भी प्रशंसा की है विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तो आशंका जताई थी कि भारत घनी आबादी वाला देश है और यहां एक गलती महामारी का रूप धारण कर सकती है इसे प्रधानमंत्री ने पहले ही भांप लिया था और उचित कदम उठा लिए थे इस कार्य की सहाना आने वाली पीढ़ियां भी करेंगी हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कोरोनावायरस आज यदि फैल रहा है तो उसके पीछे कुछ लोगों की गलत सोच रही है दिल्ली की एक मस्जिद में जिस प्रकार से कोरोना को लेकर अनियमितताएं बरती गई वह निंदनीय है आज देश को उसी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है मूर्खता यहां और बढ़ जाती है जब वहां से निकले लोग अपनी पहचान छुपाकर कहीं कहीं छुप गए हैं जबकि उन्हें एक समझदार व्यक्तित्व का परिचय देना चाहिए था और स्वयं ही अपने आसपास के स्वास्थ्य विभाग तक इसकी जानकारी देनी चाहिए थी तथा यदि वह बीमार हैं तो इलाज करवाते और यदि बीमार नहीं है तो इसकी जानकारी भी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाते परंतु दुख इस बात का है कि उन्हें पुलिस ढूंढ रही है और वह छुपते छुपा रहे हैं इसे जाहिलपन नहीं तो और क्या कहेंगे भारत जैसे देश में लॉक डाउन करना कोई आसान कार्य नहीं है परंतु भारत के युवा इस बात को भली-भांति जानते हैं कि प्रधानमंत्री ने जो अपील की है उसके पीछे कोई गहरा राज होगा तथा उनके स्वास्थ्य और परिवार के स्वास्थ्य की चिंता प्रधानमंत्री को भी होगी इसीलिए देश का हर नागरिक आज घर में बैठा है तथा कोरोना की लड़ाई में अपना सहयोग दे रहा कुछ जाहिल लोगों को छोड़कर सभी "घर में रहो सुरक्षित रहो" के मंत्र पर चल रहे हैं

ऐसी उम्मीद की जा सकती है कि जिस प्रकार केंद्र सरकार राज्य सरकारें तथा जिला स्तर पर प्रशासन के अधिकारी कोशिश में लगे हैं कि लोगों को इस संक्रमण से दूर रखा जाए जिसमें सरकार को सफलता भी मिली है और यह भी उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले समय में इस कोरोनावायरस की दवाई भी खोजने में भारत ही प्रथम राष्ट्र बनेगा
Share:

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Definition List

Unordered List

Support