----- राजेंद्र भगत-----
यूक्रेन की राजधानी कीव पर कब्जे को लेकर रूस ने अभी तक अपनी पूरी ताकत इस युद्ध में नहीं झोंकी रूसी सेना राजधानी कीव से 20-25 किलोमीटर दूर से शहर पर मिसाइलों से हमले कर रही है। इन हमलों में यूक्रेन के सरकारी विभागों के कार्यालय तथा सेना डिपू निशाने पर हैं यूक्रेन से युद्ध की जो जानकारी दुनिया तक पहुंच रही है वह अधिकतर पश्चिमी मीडिया के माध्यम से निकल कर सामने आ रही है जिसमें रूसी सेना के टैंको की तवाही एवं रूसी सैनिकों के मरने के समाचार प्रमुखता से दिखाए जा रहे हैं किंतु यूक्रेन की सेना का कितना नुकसान हुआ कितने सैनिक मारे गए इस विषय में कोई भी जानकारी दुनिया तक नहीं पहुंच रही। रूसी हमलों में बर्बाद हुए रिहायशी इलाकों की तस्वीरें भी धड़ल्ले से पश्चिमी मीडिया दुनिया को दिखा रही है ताकि यूक्रेन के प्रति दुनिया की सहानभूति को बटोरा जा सके।भारत चीन सहित दुनिया के अन्य बड़े एशियाई देश जो रूस के विरुद्ध खुलकर सामने नहीं आए वह कहीं ना कहीं रूस की कार्रवाई के प्रति अपनी सहमति जताते हुए नजर आ रहे हैं वह सिक्योरिटी काउंसिल में युद्ध को समाप्त करने और यूक्रेन एवं रूस के मध्य बातचीत को प्राथमिकता दे रहे हैं किंतु वह किसी एक पक्ष के साथ खड़े नहीं दिखाई दे रहे हालांकि अमेरिका का यह दबाव दुनिया के सभी देशों पर बढ़ता जा रहा है कि यह सभी देश रूस के विरुद्ध और अमेरिका के समर्थन में आ जाएं किंतु ऐसा होता नहीं दिखाई दे रहा। अमेरिका तथा यूरोपीय संघ भी जो युद्ध से पहले यूक्रेन को समर्थन देने की बात कह रहा था वह अब धीरे-धीरे इस युद्ध से पीछे हटता दिखाई दे रहा है
इस युद्ध की शुरुआत रूस द्वारा इसलिए की गई कि यूक्रेन यूरोपीय संघ का हिस्सा ना बने क्योंकि रूस जानता है कि यदि यूरोपीय संघ यूक्रेन तक पहुंच जाता है तो वह अमेरिकी सेना को रूस की सीमाओं तक लाने में सहायक हो सकता है जिससे रूस की सीमा असुरक्षित हो सकती है इसलिए जो देश रूस से अलग हुए हैं वह यूरोपीय संघ का हिस्सा नहीं बने केवल यूक्रेन ही ऐसा देश है जो अपनी नीति को स्पष्ट नहीं कर रहा वह किसी समय रूस के साथ था परंतु बाद में जब यूक्रेन की सत्ता पर राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की का कब्जा हुआ तो वह यूरोपीय संघ का हिस्सा बनने की जद्दोजहद में लग गया जिसको लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कई बार यूक्रेन को यह चेतावनी दी कि वह यूरोप के साथ व्यापार तो करें किंतु यूरोपीय संघ का हिस्सा ना बने परंतु यूक्रेन ने रूस की इस चेतावनी को नजरअंदाज किया क्योंकि अमेरिका भी यूक्रेन को यह भरोसा दिला रहा था कि अगर रूस ने ताकत का इस्तेमाल किया तो अमेरिका सहित यूरोप के सभी देश यूक्रेन की सेना का साथ देंगे परंतु जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो यह सभी देश पीछे हटते दिखाई दिए। फ्रांस इटली जापान सहित कुछ देशों ने यूक्रेन को हथियार इत्यादि उपलब्ध करवाएं जिन से रूसी सेना को कुछ समय के लिए तो यूक्रेन पर कब्जा करने से रोका जा सकता है किंतु अंत में यूक्रेन रूस के ही कब्जे में आ जाएगा इस युद्ध में विशेषता देखा गया है कि रूस ने अभी तक उन हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जिनका वह बड़े स्तर पर दुनिया के अन्य देशों को व्यापार करता है अभी तक छोटे और परंपरागत हथियारों का ही रूस द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है दुनिया इस बात से डरी हुई है कि आने वाले समय में रूस अपने विध्वंस हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है क्योंकि रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने दुनिया को पहले ही यह चेतावनी दे दी है कि यूक्रेन की सेना के साथ कोई भी देश सहयोग ना करें यदि किसी अन्य देश ने यूक्रेन का साथ दिया तो रूस उस देश को भी निशाना बना सकता है और रूस ऐसा कर भी सकता है क्योंकि रूसी राष्ट्रपति जो कहते हैं वह करते हैं।
इस युद्ध की पल-पल की जानकारी पश्चिमी मीडिया द्वारा दुनिया के अन्य देशों को उपलब्ध कराई जा रही है किंतु रूसी पक्ष का कोई भी समाचार किसी भी मीडिया हाउस में उपलब्ध नहीं है हालांकि कुछ देशों की मीडिया ने यह जानकारी दी है कि रूस इस युद्ध में संयम से काम ले रहा आम नागरिक हताहत ना हो इसका भी पूरा प्रबंध कर रहा है दुनिया के अन्य देशों के जो नागरिक यूक्रेन में फंसे थे उनको बाहर निकलने का समय भी युद्ध में सीजफायर करके दिया गया रूसी टैंकों और रूसी सैनिकों के आगे कतार बद्ध खड़े यूक्रेन ने नागरिकों को देखकर लगता है कि रूस भी इन नागरिकों पर बल प्रयोग नहीं करना चाहता इस से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि रूस यूक्रेन में सत्ता परिवर्तन चाहता है ना कि यूक्रेन पर कब्जा करना हालांकि यह तो तय है कि सत्ता परिवर्तन कब्जा करने के पश्चात ही होगी और रूस यह भी नहीं चाहता कि यूक्रेन के नागरिक रूस से नफरत करें यह तस्वीरें अब धीरे-धीरे दुनिया के सामने आ रही है रूस द्वारा अपने देश से फेसबुक तथा ट्विटर जैसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाकर और फेक न्यूज़ पर कड़ी कार्रवाई का संदेश देकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि इस युद्ध की सही तस्वीर दुनिया के सामने जाए रूस किस समय क्या करेगा इसकी जानकारी अब रूस के बड़े अधिकारी दे रहे हैं जिससे कि रूसी पक्ष भी दुनिया के सामने धीरे-धीरे आता जा रहा है और दुनिया यह समझने लगी है कि इस युद्ध में कौन मौकापरस्त है कौन इस युद्ध की आड़ में हथियारों को बेचना चाहता है और कौन रूस को अस्थिर करने में यूक्रेन को बड़का रहा था।






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