दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध में धकेलने वाला खलनायक कौन ?
-- राजेंद्र भगत --
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध तीसरे विश्व युद्ध के रूप में बदल सकता है इस युद्ध के कारण दुनिया तीन हिस्सों में बंटती नजर आ रही है यूरोपीय देश रूस पर दबाव बनाने की रणनीति के कारण एक साथ हैं वही रूस का समर्थन करने वाले देश स्थिति पर नजर रखे हुए हैं गुटनिरपेक्ष नियमों का पालन करने वाले देश सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और बातचीत करने का समर्थन कर रहे हैं लेकिन जिन देशों की नजर इस युद्ध के द्वारा दुनिया में हथियार बेचने और अपना दबदबा बनाने की है वह देश युद्ध को भड़काने में लगे हुए हैं चीन जैसे देश जो मौकापरस्त कहे जाते हैं वह इस कोशिश में है कि युद्ध के साथ-साथ वह किस सामान को महंगे दामों पर दुनिया को बेच सकें। नाटो मैं शामिल देशों ने इस युद्ध को अपनी साख का सवाल बना लिया है वह यूक्रेन में हो रही तबाही से अधिक अपनी ताकत का मुजाहरा करते अधिक नजर आ रहे है अमेरिका जो स्वयं तो युद्ध में शामिल नहीं है परंतु इस कोशिश में है कि वह इस युद्ध के माध्यम से रूस को कमजोर कर सकें वहीं ब्रिटेन जैसे देश भी इस लालसा में है कि वह इस युद्ध को भड़का कर अपने हथियारों की बिक्री को बढ़ा सकें यह जानते हुए भी कि युद्ध की चिंगारी किसी भी समय विश्व युद्ध का रूप धारण कर सकती है। अगर इस युद्ध में परमाणु हथियारों का उपयोग होता है तो दुनिया में तबाही निश्चित है और युद्ध को रोकना असंभव हो जाएगा दुनिया के इन बड़े देशों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि युद्ध के कारण आर्थिक संकट गहराता जा रहा है इन देशों पर निर्भर रहने वाले छोटे देश महंगाई की मार झेल रहे हैं तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही है अनाज और फर्टिलाइजर का संकट बढ़ता जा रहा है जिसका सीधा असर आम जनमानस पर पड़ता है जिससे बड़े-बड़े देशों की आर्थिक स्थिति डगमगा जाती है परंतु दुनिया के संपन्न देशों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता उन्हें तो केवल अपने दबदबे और हथियारों की बिक्री पर केंद्रित रहकर दुनिया को आर्थिक संकट में डालना बेहतर लग रहा है अगर यह युद्ध विश्वयुद्ध के रूप में बदलता है तो 21वीं सदी को आर्थिक संकट से निकलने में 50 वर्ष लग जाएंगे इन 50 वर्षों में कितनी तबाही और बर्बादी होगी इसका अनुमान लगाना भी कठिन है।







So nice sir
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