शुद्ध हिंदी बोलने की शैली भारतीय संविधान और राज्य के इतिहास एबं राजनीतिक ज्ञान के कारण धीरे धीरे इनकी चर्चा मीडिया में होने लगी थी


मेरी कलम से.......राजेंद्र भगत

हर व्यक्ति का मस्तिष्क जीवन की कई कहानियों को अपने में समेटे रखता है जब उन कहानियों में किसी का मित्र या सहपाठी किसी बड़े मुकाम तक पहुंचता है तो उसके साथ बिताए जीवन के वो लम्हे जीवन की यथार्थ सुंदर कहानियों में परिवर्तित हो जाते हैं मुझे याद है

वर्ष 2009-10 की बात होगी उस समय मैं जम्मू के इवनिंग न्यूज़ पेपर के लिए लिखता था तथा कुछ संगठनों एबं पार्टियों के लिए प्रेस नोट इत्यादि भी बनाता था इसलिए जम्मू के बहुत से सक्रिय युवकों राजनेताओं और पत्रकारों के साथ मेरा मिलना जुलना था जिनमें रविंद्र रैना एक थे उस समय रविंद्र रैना जिन्हें हम रविंद्र भाई जी कहकर पुकारते थे
वह राजनीति से दूर थे बहुत बार इनके साथ बैठने का सौभाग्य मिलता था संघ के प्रचारक होने के कारण इनकी हिंदी शब्दों पर बहुत मजबूत पकड़ थी जो हमे अच्छी लगती थी तथा जम्मू कश्मीर के इतिहास संबंधी इन्हें पूरी जानकारी थी वह कई बार चर्चा के दौरान नई-नई जानकारियां इनसे हमें प्राप्त हो जाती थी यह मैं इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि उस समय के सक्रिय नेताओं में प्रीतम शर्मा जी जो क्रांति दल के अध्यक्ष हैं जगदीश सूदन जी जो अभी अध्यापक हैं वह मेरे साथ फोटोग्राफी का कार्य करते थे तथा रविंद्र रैना जो हमें मित्र के तौर पर बहुत पसंद थे क्योंकि हम सभी में रविंद्र रैना इतिहास का हम से अधिक ज्ञान रखते थे कई बार हमने रविंद्र भाई से कहा कि वह राजनीति में जाएं परंतु वह राजनीति से हमेशा दूरी बना कर रखते थे उनका मानना था कि राजनीति के लिए हम नहीं बने।
इनकी शुद्ध हिंदी बोलने की शैली भारतीय संविधान और राज्य के इतिहास के ज्ञान के कारण धीरे धीरे इनकी चर्चा मीडिया  जगत में भी होने लगी मुझे याद है उन्ही दिनों 2011 में अन्ना हजारे का लोकपाल बिल की मांग को लेकर आंदोलन पूरे देश में तेजी से फैल रहा था जम्मू कश्मीर में भी राज्य और केंद्र सरकार से बहुत से लोग असंतुष्ट थे जिस कारण अन्ना हजारे के आंदोलन में युवकों की संख्या लगातार बढ़ रही थी रविंद्र रैना भी उस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे जिस कारण मीडिया के कैमरे हमेशा इनको ढूंढते रहते थे कई बार स्टार न्यूज़ के डिबेट कार्यक्रम में भी मैं शामिल होते थे हालांकि हम भी वहां मौजूद रहते थे परंतु इनकी बोलने की शैली एंकरों को काफी प्रभावित करती थी तथा जम्मू कश्मीर के इतिहास से संबंधित इनकी जानकारियां मीडिया जगत सुनना चाहता था जिस कारण लोग इस चेहरे को जानने लगे मुझे याद है
 एक बार रविंद्र भाई शाम के समय दिल्ली जाने वाली बस का इंतजार करते हुए मेरे साथ इंदिरा चौक बैठे थे उस समय उन्होंने मुझे बताया कि भाजपा के युवा विंग में मुझे शामिल करने के लिए पार्टी के बहुत से लोग कह रहे हैं क्या करूं तब मैंने कहा कि रविंद्र भाई जो आप कहना चाहते हो जो आप करना चाहते हो या फिर जिस तरह के भारत की छबि को आप बनाने के सपने देखते हो वह राजनीति में आकर ही बनाए जा सकते हैं मुझे याद है उस समय कुछ दिनों तक रविंद्र भाई ने आपने बहुत से मित्रों से इस सम्बंध में राय ली थी कि मैं राजनीति में जाऊं या ना जाऊं सब ने उन्हें राजनीति में जाने को कहा फिर कुछ दिनों बाद समाचारों में पढ़ने को मिला कि रविंद्र रैना ने भाजपा ज्वाइन कर ली है क्योंकि रविंद्र रैना,अन्ना हजारे आंदोलन के दौरान जम्मू में अपनी पहचान बना चुके थे कई राष्ट्रीय चैनलों पर भी इन्हें देखा जा सकता था इसके बाद रविंद्र भाई से कभी कभार मिलना होता था क्योंकि वह राजनीति में व्यस्त हो गए थे परंतु इसके बावजूद वह जहां कहीं भी हमें देखते वहीं रुक कर हाल-चाल जरूर पूछते।
इतना ही नहीं मुझे याद है कुछ वर्षों बाद हमारे मित्र जगदीश सूदन ने मुझे फोन करके बताया कि सुंदरबनी के बाजार से जब बह गुजर रहा था तो पीछे से एक गाड़ियों का काफिला आ रहा था जिसमें रविंद्र भाई मौजूद थे और उन गाड़ियों में से रविंद्र भाई ने आवाज देकर जगदीश सुदन को रुकवाया तथा हाल-चाल जाना इनकी यह खासियत रही है कि वह दोस्तों को भूलते नहीं अब भी कभी कबार जब मुझे भाजपा कार्यालय जाने का मौका मिलता है तो रविंद्र रैना उसी अंदाज में मिलते हैं जिस तरह पहले मिला करते थे उनमें पद को लेकर जरा भी घमंड मुझे नजर नहीं आया यह केवल मेरा अनुभव ही नहीं है बहुत से हमारे मित्रों ने हमें बताया कि रविंद्र भाई पहले जैसे ही हैं हां केवल व्यस्त होने के कारण उन तक पहुंचना थोड़ा मुश्किल जरूर है परंतु जब भी मिलते हैं उसी पुराने अंदाज में जैसे पहले उनका दोस्ताना अंदाज था शायद उनकी यही छबि उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचा लाई है
बह दुख सुख में अपने दोस्तों के पास पहुंचने का भरपूर प्रयास करते हैं चाहे कितने भी अधिक व्यस्त क्यों ना हो अभी पिछले दिनों अपने मित्र जो पार्टी के कार्यकर्ता भी थे जिनकी आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी वह उनके जनाजे में पहुंचे थे तथा परिवार की भांति उनके अंतिम संस्कार में साथ रहे जिस कारण वह कोरोना सक्रमण की चपेट में आ गए परंतु वह आज भी सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं अपनी पल-पल की जानकारी तथा अपनी गतिविधियों को सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं दोस्तों की पोस्ट पर कमेंट/लाइक जन्मदिन की बधाई या दुखद साथी को दिलासा देना इत्यदि

उनका दोस्ताना अंदाज जग जाहिर है आज से कुछ वर्ष पहले जब बह जम्मू कश्मीर भाजपा अध्यक्ष नहीं थे तब मैंने उनकी पोस्ट पर कमेंट किया कि रविंद्र भाई आपको मुख्यमंत्री होना चाहिए इस बात को लेकर वह बहुत हंसे और उन्होंने कहा कि मैं कार्यकर्ता ही अच्छा हूं परंतु उसके बाद सोशल मीडिया पर उनके मुख्यमंत्री बनने की अटकलें भी तेज हो गई और वैसे भी अगर देखा जाए तो इस समय जैसी उनकी छबि है और पार्टी में जिस प्रकार उनका जम्मू कश्मीर की राजनीति में कद अंदाज़ और शैली है उनमें मुख्यमंत्री की दावेदारी के सभी लक्षण मौजूद हैं। राजीनीति के किसी भी पद पर जाएँ पर इतना तो तय है कि भारतीय राजनीति के शीर्ष पद या देेेश के किसी अन्य महत्वपूर्ण पद पर जरूर जाएंगे
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