पत्रकारों पर हमले लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक "रिपब्लिक भारत" चैनल पर महाराष्ट्र सरकार का हमला पत्रकारों के अधिकारों का हनन

 


राजेंद्र भगत की कलम से....

लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों पर हमले चिंता का विषय है लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यदि असहाय हो जाएगा तो दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश होने का ताज पहने भारत, जिसका मान और सम्मान तथा विश्व को लोकतंत्र व्यवस्था की शिक्षा देने का मान पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाता है उस पर आघात होगा। भारत को पहचान इसी लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण मिली है क्योंकि यहां का जनमानस लोकतांत्रिक ढंग से अपनी सरकार चुनता है तथा जहां के नागरिक अपनी बोलने की आजादी का इस्तेमाल करता हैं और समय आने पर अपने वोट के माध्यम से बड़ी-बड़ी सरकारों को सत्ता से उखाड़ फेंकने की ताकत रखते है और लोकतंत्र का चौथा स्तंभ जनता की आवाज बनकर सरकार को उसका काम याद दिलाता है और सरकार का काम जनता तक पहुंचाने में अपना योगदान देता है देश के हर क्षेत्र तक विकास पहुंचे इसके लिए पत्रकार हर उस क्षेत्र की व्याख्या और जानकारी देश और दुनिया तक पहुंचाता है ताकि उस क्षेत्र का विकास हो सके जनता की आवाज सरकार तक पहुंचाने में पत्रकार का महत्वपूर्ण योगदान रहता है इस योगदान को समाप्त नहीं किया जा सकता क्योंकि यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के तौर पर हमारे संविधान में दर्ज है और लोकतंत्र प्रक्रिया में संविधान ही सर्वोच्च होता है यदि संविधान से हटकर सरकारें अपनी मनमानी करेंगी तो लोकतंत्र खतरे में आ जाएगा

पिछले कई वर्षों से पत्रकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं यह हमले केवल माफिया या भ्रष्टाचारियों की ओर से ही नहीं अपितु जो सरकारें जनता के कार्य करने में असमर्थ रही हैं वह पत्रकारों की आवाज को दबाने का प्रयास करती हैं आपातकालीन समय में पत्रकारों पर पाबंदी लगा दी गई फिर प्रेस सेंसरशिप जैसे काले कानून पत्रकारों पर थोपने का प्रयास किया गया इसके बाद सरकारों ने नए हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए एक एक पत्रकार को कानूनी विवादों में डालकर उनकी आवाज को बंद करने की कोशिश की गई जो आज भी लगातार जारी है 

पिछले कुछ समय से लगातार दर्शकों की पसंद बनते जा रहे रिपब्लिक भारत चैनल पर महाराष्ट्र सरकार की गिद्ध जैसी नजर लोकतंत्र के इस चौथे स्तंभ के लिए घातक सिद्ध हो रही है इस चैनल के पत्रकारों और चैनल के संपादक पर सरकार द्वारा कानून के माध्यम से लगातार हमले हो रहे हैं और देश के अन्य पत्रकार भी सहमे में हुए हैं कि अगर महाराष्ट्र की सरकार पत्रकारों पर इस तरह से अंकुश लगा सकती है तो फिर देश के अन्य राज्यों में भी इस तरह की घटनाएं तेजी से बढ़ सकती हैं और ऐसा हो भी रहा है हालांकि बहुत सी राज्य सरकारों ने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कुछ ऐसे कानून बनाए हैं जो पत्रकारों को अपनी बात कहने के लिए स्वतंत्र करते हैं परंतु ऐसे कानून मात्र बहुत कम जगह पर हैं और अन्य राज्यों में लगातार पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं इनमें अधिकतर हमले फर्जी मामलों में पत्रकारों को फंसा कर उनकी कलम को रोकने की कोशिश की जा रही है

जम्मू कश्मीर में भी पत्रकारों पर वर्षों से इस प्रकार के हमले जारी हैं लंबे समय के आतंकवाद के दौरान पत्रकारों पर हर प्रकार से हमले हुए एक तरफ आतंकवादियों के हमले तथा दूसरी ओर प्रशासन के हमले। आतंकवादी सच को दबाना चाहते थे वह कहां से आए और कैसी करतूतें करते हैं यह सर्वजनिक ना हो इसलिए कलम पर अंकुश लगाना चाहते थे और दूसरी राज्य सरकारें जो सत्ता में रही उनकी नाकामियों और आतंकियों से उनकी सांठगांठ तथा जनता के लिए कार्य न कर पाना जब उजागर होता था आवाज केंद्र सरकार तक पहुंचती थी तो इसका जिम्मेवार पत्रकार माना जाता इस अशांत राज्य में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंचा जिसे पत्रकारों ने बेनकाब किया ऐसे कई कारण रहे जिसमें पत्रकारों पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया और पत्रकारों को फर्जी मामलों में फसाया गया सरकारें सुनियोजित ढंग से पत्रकारों पर अंकुश लगाती है वह पत्रकारों को प्रताड़ित करने के लिए ऐसे मामले तलाश करती है जिस मामले से पत्रकार का सीधा सरोकार ना हो और उसकी व्यक्तित्व छबि पर हमला हो। सरकारें पत्रकारों पर हमला करते हुए ऐसे पत्रकारों का भी साथ ले लेती हैं जो उनके भ्रष्टाचार में शामिल होते हैं और जब वह किसी इमानदार पत्रकार पर कार्रवाई करती है तो वह आपने उस भ्रष्टाचारी पत्रकार दोस्त का भी साथ ले लेती है जो उस इमानदार पत्रकार को गलत साबित करने के लिए पत्रकार का चोला अपनाकर हो-हल्ला करना शुरू कर देता है


आज भी जब किसी व्यक्ति को सरकार से न्याय नहीं मिलता तो उसकी उम्मीद यह रहती है कि वह किसी पत्रकार के सामने जाकर अपनी व्यथा सुनाएं उसे उम्मीद होती है कि पत्रकार उसकी आवाज को देश तक पहुँचाएगा और उसे न्याय दिलाने में मदद करेगा और ऐसा होता भी रहा है देश में कई ऐसे मामले देखे गए हैं जिनमें पत्रकारों ने बड़े-बड़े भ्रष्टाचारी और बड़े बड़े मंत्रियों को उनकी करतूतों सहित बेनकाब किया है और ऐसे भी मामले देश दुनिया ने देखे हैं जिसमें देश के दूरदराज क्षेत्र के किसी गांव में रहने वाले गरीब व्यक्ति की आवाज देश के प्रधानमंत्री तक पहुंची हो और प्रधानमंत्री ने उस गरीब की पीड़ा को सुना ऐसा केवल पत्रकारों के कारण ही हुआ क्योंकि पत्रकार जनमानस की आवाज होता है वह जनता की आवाज को देश के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति तक भी पहुंचा देता है इसलिए पत्रकारों की सुरक्षा करना राज्य सरकारों एवं केंद्र सरकारों का दायित्व होना चाहिए पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है जो जनता और प्रशासन के बीच की कड़ी को मजबूत करने में सहायता करता है वह जनता को सरकार की योजनाएं बताने के साथ-साथ जनता की पीड़ा सरकार तक पहुंचाने का माध्यम बनता है आज की पत्रकारिता पूरे देश का स्वरूप उस का रहन सहन खानपान सरकार का कार्य और जनता क्या सोचती है यह सारी जानकारी पूरे विश्व तक पहुंचाता है इस इलेक्ट्रॉनिक युग में भारतीय पत्रकारों का दायरा पूरे विश्व तक पहुंचा है जिससे दुनिया में भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का लोहा पूरा विश्व आज मानता है इन सब का श्रेय पत्रकारों पर ही जाता है इसलिए पत्रकारों को सुरक्षा देना सभी सरकारों का कर्तव्य है अगर पत्रकार सुरक्षित नहीं है तो लोकतंत्र भी सुरक्षित नहीं है

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1 comments:

  1. लंबे समय से पत्रकारों की आवाज को दबाया जा रहा है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद से पत्रकार खुलकर अपनी बात लोगों के सामने रख पा रहे हैं लेकिन आज भी कुछ भ्रष्टाचारी लोग पत्रकारों की आवाज को दबाने का प्रयत्न कर रहे हैं और समय आ गया है लोग जो सही पत्रकार हैं उनका सहयोग करें ।।

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