राजेंद्र भगत
जम्मू में अपराधिक मामलों में बढ़ोतरी चिंता का विषय है महिलाओं पर उत्पीड़न के मामले चोरी एवं झपट मार की घटनाएं में बढ़ोतरी,नशे का कारोबार और अपहरण के मामले जम्मू जैसे क्षेत्र में बढ़ना चिंता का विषय है। अपराधी भी पकड़े जा रहे हैं पुलिस पर पक्षपाती होने का आरोप भी कई बार लगा है परंतु इसके बाबजूद कोई ऐसी रणनीति पुलिस नहीं अपना सकी जिससे अपराधिक मामलों में कमी आए।
__जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद ऐसी संभावनाएं थी कि यहां का शासन केंद्र के आधीन होने के कारण विभाग सक्रिय भूमिका निभाएंगे और स्थानीय नागरिकों का जीवन सुरक्षित होगा परंतु घटनाओं की संख्या बढ़ने के कारण जनता में आक्रोश की भावना पनपने लगी है यदि पिछले दिनों हुए महिला उत्पीड़न के मामलों को देखें तो ऐसे मामले प्रकाश में आए जिसमें बलात्कार और छेड़छाड़ की घटनाएं प्रमुख रही जिसके बाद पीड़ित महिला का परिवार इंसाफ मांगते हुए पुलिस स्टेशन के आगे धरना प्रदर्शन करते दिखाई दिया। कई मामलों में तो जनता एबं राजनीतिक संगठनों ने सरकार को नाकाम सरकार की संख्या देकर उन्हें शासन करने में असमर्थ बताया और 370 से पहले की स्थिति को वेहतर बताया। हालांकि इस प्रकार के तर्क राजनीतिक पार्टियों के अपने राजनीतिक एजेंडे होते हैं परंतु जनता का उत्पीड़न होना चिंता का विषय है जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के अधीन आते ही जनता को यह उम्मीद थी कि बह एक ऐसे शासन के अधीन आए हैं जिसमें अपराध पर कारवाई तुरंत की जाती है और यहां हो रहे अपराधों पर कार्रवाई तुरंत होगी पर ऐसा होता शायद दिखाई नहीं दिया जिसको लेकर जनता आक्रोशित दिखी।
ज्ञात रहे कि जब केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया उस समय केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर के नागरिकों के साथ यह वादा किया था कि स्थानीय नागरिकों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित माहौल उपलब्ध होगा सरकार रोजगार उपलब्ध कराने में मदद करेगी परंतु पिछले कुछ समय में हुए अपराधिक मामलों में बढ़ोतरी चिंता का विषय है जनता यह सोचने पर मजबूर होने लगी है कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद इस तरह का माहोल कहीं दिल्ली जैसे प्रदेश में जिस प्रकार अपराधिक मामले होते हैं कहीं जम्मू कश्मीर में भी उसी तरह का माहोल ना बन जाए। अपराधिक मामलों में बढ़ोतरी के कारण पुलिस के उच्च अधिकारियों ने उचित कदम भी उठाएं कुछ कर्मचारियों पर कारवाई होती भी दिखी परंतु स्तिथि में कोई बदलाव होता नजर नहीं आया शायद विभागों पर की गई कार्रवाई बहुत कम है और प्रशासन को अभी और बहुत कुछ करना बाकी है तभी सुरक्षित माहौल उपलब्ध हो सकता है







0 comments:
एक टिप्पणी भेजें