तेरा इस तरह से जाना लौट कर फिर ना आना।

 

सिद्ध नाज़ 


तेरा इस तरह से जाना 

लौट कर फिर ना आना। 


इक सपना सा लगता है 

तू हर पल अपना सा लगता है। 


क्यों तू मुझको छोड़ गया 

वादे सारे तोड़ गया।



तन्हा मुझको कर गया 

दिल में दर्द भर गया। 


बिन तेरे मैं क्या करूं 

ना जी सकूँ ना मरूं। 


याद तेरी सता रही है 

नींद भी ना आ रही है।


मुझको अपने पास बुला लो 

सीने से लगा कर सुला दो। 


बिना तेरे यहां कुछ नही

तू इक बार आ तो सही।


सूनी पड़ी है मांग मेरी 

मैं तो हूं बस तेरी।


सुहागन मुझको बना जा तू 

इक बार लौट कर आ जा तू। 


फिर ना तुझको जाने दूंगी 

संग तेरे सात मैं फेरे लूँगी। 


खाई जो कसमें पूरी कर दे 

मेरी ज़िंदगी में फिर रंग भर दे। 


मेरे "सिद्ध" तू वापिस आ जा 

अपनी "नाज़" को छोड़ के ना जा। 




              सोफिया जंगराल 

                      जम्मू

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